चंडीगढ़ प्रशासन ने तय किए नियम
दिवाली की रात 8 से 10 बजे तक ही चला पाएंगे पटाखे

चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों का पालन करते हुए त्योहारों के लिए पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर नियम लागू किए हैं। चंडीगढ़ में सिर्फ वही पटाखे बेचे और चलाए जा सकेंगे, जो सीएसआईआर-नीरी से सर्टिफाइड ग्रीन क्रैकर्स कैटेगरी में आते हैं। एन्वायर्नमेंट और नॉयस पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लड़ी (सीरीज) वाले पटाखों की बिक्री पर पूरी पाबंदी रहेगी, भले ही ये ग्रीन कैटेगरी के क्यों न हों। सभी तरह की ई-कॉमर्स कंपनियों के चंडीगढ़ क्षेत्र में पटाखों की ऑनलाइन डिलीवरी या ऑर्डर लेने पर रोक रहेगी।
18 दिन पिछली दिवाली से 18 बाद, लेकिन अभी पॉल्यूशन से राहत बनी हुई…
पिछले साल दिवाली 20 अक्टूबर को थी। उस समय 12 अक्टूबर से ही एयर पॉल्यूशन लगातार बढ़ना शुरू हो गया था। इस बार दिवाली 8 अक्टूबर को है, लेकिन फिलहाल इस साल एयर पॉल्यूशन से राहत बनी हुई है। चंडीगढ़ में एयर क्वालिटी इंडेक्स 26 अक्टूबर को भी संतोषजनक कैटेगरी में 67 पॉइंट के पास ही है। पिछले 6 महीनों में अभी तक सिर्फ एक ही दिन एयर पॉल्यूशन थोड़ा बढ़कर मॉडरेट कैटेगरी में पहुंचा था। पिछले साल दिवाली जल्दी थी, तब भी एयर क्वालिटी इंडेक्स दिवाली वाले दिन अलग-अलग एरिया में अधिकतम 318 पॉइंट तक पहुंच गया था। चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी ने फेस्टिवल सीजन के दौरान मॉनिटरिंग को तेज किया है। अलग-अलग एरिया से रिपोर्ट बनवाई जा रही है। इस बार दिवाली में देरी और तापमान ज्यादा कम रहने से प्रदूषण के बढ़ने की संभावना ज्यादा है। क्योंकि नवंबर में हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है। इससे एयर पॉल्यूटेंट्स हवा में ठहर जाते हैं और अगर हवा की स्पीड तेज न हो या बारिश न हो तो इससे पॉल्यूशन का स्तर तेजी से बढ़ता है।
दीवाली पर रात 8 से 10 बजे तक पटाखे चलाने की मंजूरी होगी। गुरुपर्व पर सुबह 4 से 5 बजे और रात 9 से 10 बजे तक का समय तय किया गया है। इन नियमों की पालना करवाने की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पर होगी। अगर किसी एरिया में प्रतिबंधित पटाखे चलते हैं या तय समय का उल्लंघन होता है तो संबंधित थाने के एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उल्लंघन करने वालों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।


