देश की राष्ट्रीय राजनीति में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) और कथित वोट चोरी के विवाद को लेकर गर्मागर्मी बनी हुई है। दिल्ली में विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन द्वारा चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ लगातार विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

इस पूरे विवाद और राष्ट्रीय राजनीति में चल रहे घटनाक्रम का पूरा अपडेट नीचे दिया गया है:
1. दिल्ली में विपक्ष का मेगा प्रदर्शन और ‘जन महाभियोग’
* रामलीला मैदान में महारैली: मतदाता सूची से भारी संख्या में नाम हटाए जाने के विरोध और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली और मार्च निकाला।
* प्रमुख नेताओं की मौजूदगी: इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और एनसीपी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए।
* मुख्य मांग: विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सुनियोजित तरीके से लाखों-करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।
2. विवाद की मुख्य वजह: SIR और मतदाता सूची
* विपक्ष के आरोप: विपक्षी दलों का दावा है कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ या मतदाताओं के नाम हटाने का खेल चल रहा है। देश के कई राज्यों में वोटर लिस्ट से नाम कटने को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
* चुनाव आयोग का पक्ष: चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि SIR से जुड़े सभी फैसले पूरी पारदर्शिता और सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध (Dead या फर्जी मतदाताओं को हटाकर) करना है।
3. राजनीतिक टकराव: सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
* भाजपा का पलटवार: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के इन प्रदर्शनों को चुनावी हार की खीझ और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की राजनीति करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव में लगातार मिल रही असफलताओं के बाद विपक्ष अपनी नाकामी छुपाने के लिए चुनाव आयोग पर झूठे आरोप मढ़ रहा है।
* व्यापारियों का मुद्दा: दिल्ली में हुई इस रैली को लेकर स्थानीय व्यापार मंडलों ने चिंता जताई थी कि त्योहारी सीजन में इस तरह के बड़े प्रदर्शनों से बाजारों और व्यापार पर बुरा असर पड़ सकता है।
4. कानूनी और न्यायिक पक्ष
* यह पूरा मामला अब सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग के पक्षों को सुनते हुए आगामी सुनवाई के लिए तारीख तय की है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

