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मां की बीमारी से टूट गया था परिवार, ठीक हुई तो 12 ज्योतिर्लिंगों की ओर दौड़ पड़ा बेटा

मां की बीमारी से टूट गया था परिवार, ठीक हुई तो 12 ज्योतिर्लिंगों की ओर दौड़ पड़ा बेटा

पटना: मां की बीमारी ने एक बेटे को ऐसा संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया, जिसने अब उसके जिंदगी की दिशा ही बदल दी है. बिहार के अररिया जिले के मोनू मेटुरबाला (19 वर्ष) ने अपनी मां की सलामती के लिए भगवान शिव से मन्नत मांगी थी. उन्होंने तय किया था कि मां स्वस्थ हो गईं, तो वह दौड़कर देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करेंगे. मां की सेहत में सुधार के बाद मोनू ने अपना वादा निभाने के लिए लंबी यात्रा शुरू कर दी.

 

मां की परेशानी बनी बेटे के संकल्प की वजह

मोनू की मां लालती देवी की तबीयत खराब होने के बाद परिवार चिंता में पड़ गया था. मोनू की मां मालती देवी ने बताया कि उनके गले में मछली का कांटा फंसने से परेशानी बढ़ गई थी. इस मुश्किल दौर में मोनू ने भगवान शिव से मेरी बीमारी ठीक होने की प्रार्थना की. इसी दौरान उन्होंने 12 ज्योतिर्लिंगों तक दौड़कर पहुंचने की मन्नत मांगी. जब मेरी तबीयत ठीक हो गई तो वह दर्शन के लिए निकल पड़ा. अब उनकी कोशिश है कि रास्ते की मुश्किलों के बावजूद संकल्प पूरा करके ही घर लौटें.

 

“मेरे गले में मछली का कांटा फंस गया था. बहुत तकलीफ हो रहा था. उसी दौरान मेरे बेटे ने संकल्प लिया कि ठीक होने पर वह 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन दौड़-दौड़ कर करेगा. जब मैं ठीक हो गई तो मेरा बेटा मार्च महीने में घर से निकला. अभी वह महाराष्ट्रा में है. जब से निकला है वह घर नहीं आया, 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद ही लौटेगा.”- मालती देवी, मोनू की मां

मां लालती देवी को बेटे पर गर्व

 

मोनू की इस यात्रा के पीछे मां के प्रति उनका लगाव सबसे अहम वजह है. मां की बीमारी के समय की गई प्रार्थना अब हजारों किलोमीटर के सफर में बदल चुकी है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लालती देवी को अपने बेटे के इस प्रयास पर गर्व है. एक तरफ मोनू अपने संकल्प को पूरा करने में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ परिवार को उनकी सुरक्षित वापसी का इंतजार है.

 

मोनू की मां के मुताबिक उसने मार्च 2026 को अपनी यात्रा शुरू की थी. इस सफर में उन्हें अलग-अलग राज्यों से गुजरते हुए शिव के प्रमुख तीर्थस्थलों तक पहुंचना है. उनकी यात्रा की दूरी करीब 8,000 किलोमीटर बताई गई है. वह प्रतिदिन लगभग 50 किलोमीटर दौड़ने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं. हालांकि, यात्रा की कुल दूरी और अब तक पूरे किए गए पड़ावों का अपडेट आंकड़ा नहीं मिल पाया है. फिलहाल मोनू महाराष्ट्र में हैं.

 

अब दौड़ ही बना मिशन

मौनू को अपना संकल्प पूरा करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है. नियमित 50 किमी दौड़ना यानी हर दिन एक मैराथन से भी ज्यादा की दूरी के बराबर है, इसलिए मोनू के सामने थकान एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है. फिर भी वह अपने लक्ष्य को पूरा करते हैं. मोनू की जिंदगी हमेशा से धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं रही. वह पढ़ाई और क्रिकेट में रुचि रखते थे. परिवार की मदद के लिए गोलगप्पे बेचने और बिजली मिस्त्री का काम करने का अनुभव भी उनके पास है.

 

12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन पूरे करना है लक्ष्य

 

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं. इन सभी तक दौड़कर पहुंचने का संकल्प आसान नहीं है. मोनू की यात्रा में धार्मिक आस्था के साथ शारीरिक सहनशक्ति और लगातार प्रयास करने की जरूरत भी है. उनके सफर को लेकर लोगों की दिलचस्पी इसलिए भी है, क्योंकि इसकी शुरुआत मां के स्वस्थ होने की कामना से हुई थी.

 

श्रवण कुमार की याद दिला रही मां-बेटे की यह कहानी

 

मोनू के संकल्प को कई लोग माता-पिता के प्रति समर्पण के प्रतीक श्रवण कुमार की कथा से जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि दोनों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन चर्चा का केंद्र माता-पिता के प्रति प्रेम और सेवा की भावना है. मोनू के लिए इस यात्रा का व्यक्तिगत अर्थ अपनी मां के स्वस्थ होने के समय लिया गया वचन पूरा करना है. उनका अगला लक्ष्य बाकी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करके इस संकल्प को पूरा करना है.

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