बिहार में बड़ा वेतन घोटाला (Bihar Salary Scam): 10 लाख से अधिक शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के वेतन पर रोक, जानिए पूरी खबर
मुख्य समाचार (Headlines)
* 10 लाख से ज्यादा कर्मियों पर असर: बिहार में महालेखाकार (AG) की ऑडिट रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं सामने आने के बाद राज्य के करीब 9 लाख शिक्षाकर्मियों और 1.30 लाख पुलिसकर्मियों के अक्टूबर महीने के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
* पोर्टल में सेंधमारी: HRMS (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) और CFMS (कॉम्प्रीहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल में हेरफेर कर फर्जी तरीके से बेसिक सैलरी, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य भत्ते बढ़ाकर भुगतान करने का मामला उजागर हुआ है।
* सरकार और वित्त विभाग सख्त: वित्त विभाग ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) और संबंधित विभागों को दस्तावेजों की कड़ी जांच के आदेश दिए हैं। जांच पूरी होने और रिपोर्ट आने के बाद ही वेतन जारी किए जाएंगे।
घोटाले के मुख्य खुलासे (Key Highlights of the Scam)
* भागलपुर फर्जी शिक्षिका मामला (98 लाख का गबन):
भागलपुर जिले में एक फर्जी शिक्षिका की आईडी बनाकर सरकारी खजाने से 98.12 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया। इस मामले में डीपीओ (DPO) और डेटा ऑपरेटर की गिरफ्तारी हो चुकी है तथा कई लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
* पटना में HRA का बड़ा खेल (76 लाख की गड़बड़ी):
पटना सिटी के फतह नारायण सिंह अकादमी स्कूल में 76.71 लाख रुपये के वित्तीय फर्जीवाड़े का मामला सामने आया। यहां मकान किराया भत्ता (HRA) नियमों के विपरीत करीब 20% की जगह 200% तक बढ़ा-चढ़ाकर दिया गया। हालांकि दबाव के बाद संबंधित कर्मियों ने राशि वापस कर दी, लेकिन ब्याज और अन्य विसंगतियों पर जांच जारी है।
* क्लाइमेक्स और मनमाने भुगतान के दावे:
जांच के दौरान कुछ मामलों में लिपिकों (Clerks) द्वारा अपनी सैलरी या अन्य खातों में नियमों के विरुद्ध लाखों रुपये (जैसे एक लिपिक को 9.81 लाख रुपये प्रति माह तक का दावा) ट्रांसफर करने जैसी चौंकाने वाली बातें भी सामने आई हैं।
कैसे होता था खेल? (Modus Operandi)
* गलत ऑनबोर्डिंग: कर्मचारियों की नियुक्ति या डेटा एंट्री के समय ही HRMS पोर्टल पर मूल वेतन (Basic Salary) या भत्तों की राशि को चुपके से बढ़ाकर दर्ज कर दिया जाता था।
* फर्जी आईडी और बिल: कई जगहों पर फर्जी शिक्षकों या कर्मचारियों के नाम पर आईडी जनरेट कर डिजिटल हस्ताक्षर और अप्रूवल की मिलीभगत से बिल पास कराए गए।
* मेकर-चेकर लूपहोल: अब तक निचले स्तर पर बिल तैयार करने और पास करने की प्रक्रिया में जो कमियां थीं, उसका फायदा उठाकर घपले को अंजाम दिया गया।
प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई (Administrative Action)
* वेतन सत्यापन अनिवार्य: वित्त विभाग के निर्देशानुसार, अब जब तक ग्राउंड लेवल से लेकर सचिवालय और डीजीपी ऑफिस तक के सभी पे-रिकॉर्ड्स की सूक्ष्म जांच नहीं हो जाती, तब तक वेतन जारी नहीं होगा।
* आपराधिक मुकदमे और वसूली: फर्जी बिलों को मंजूरी देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जा रही है। अवैध रूप से निकाली गई सरकारी राशि की रिकवरी के साथ-साथ उन पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।
* भविष्य के लिए कड़े नियम: भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए अब केवल नियमित और राजपत्रित (Regular) पदाधिकारियों को ही सैलरी बिल का ‘मेकर, चेकर और अप्रूवर’ बनाने के निर्देश दिए गए हैं।



