अगले दिन खरीदनी थी नई कार… किसान परिवारों में बांट दिए ₹1.5 करोड़! ऐसे थे नाना पाटेकर
आज नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं रहे. सिनेमा के रूपहले पर्दे पर अपने दमदार डायलॉग और कभी न भूल पाने वाले अभिनय से लोगों के दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर की असली जिंदगी का यह किरदार शायद उनकी फिल्मों के किसी भी किरदार से ज्यादा बड़ा था.

कुछ कहानियां पर्दे पर नहीं लिखी जातीं, उन्हें इंसान अपने फैसलों से लिखता है. नाना पाटेकर की जिंदगी से जुड़ा यह किस्सा भी कुछ ऐसा ही है. एक तरफ अपनी नई कार खरीदने का सपना था, दूसरी तरफ उन घरों का दर्द था, जहां किसान की मौत के बाद चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया था. नाना पाटेकर के सामने उस दिन दो रास्ते थे. एक रास्ता उन्हें उनकी पसंद की नई कार तक ले जाता था, और दूसरा उन करीब 1,000 किसान परिवारों तक, जिनके घरों में आत्महत्या ने हमेशा के लिए सन्नाटा भर दिया था. उन्होंने कार का सपना टाल दिया और करीब 1.5 करोड़ रुपये उन परिवारों के नाम कर दिए.
यह सिर्फ मदद नहीं थी, यह उस दर्द के साथ खड़े होने की कोशिश थी, जिसे अक्सर दुनिया कुछ दिनों बाद भूल जाती है. सिनेमा के रूपहले पर्दे पर अपने दमदार डायलॉग और कभी न भूल पाने वाले अभिनय से लोगों के दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर की असली जिंदगी का यह किरदार शायद उनकी फिल्मों के किसी भी किरदार से ज्यादा बड़ा था.
आज नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं रहे. आज सुबह उनके सीने में तेज दर्द हुआ और वो बेहोश हो गए. सूचना पाकर गोवा के मणिपाल अस्पताल की मेडिकल टीम उनके घर पहुंची और उन्हें कार्डियक मसाज देने के बाद अस्पताल ले गई. जहां डॉक्टरों ने तकरीबन सुबह 5.20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया. बताया जा रहा है कि, 75 साल के नाना पाटेकर को कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) हुआ था.
अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर नाना का फिल्मों में भी रेंज काफी लंबा था. चाहे वो क्रांतिवीर का ‘प्रताप नारायण तिलक’ हो या फिर वेलकम का ‘उदय शेट्टी’… हर किरदार को उन्होंने पर्दे पर कुछ ऐसा जीया जैसे वो हमारे जिंदगी का एक अहम हिस्सा हो. लेकिन असल जिंदगी में उनके सोच की रेंज इससे कहीं ज्यादा लंबी थी. किसानों के प्रति उनकी उदारता और नजरिया इस बात का गवाह है कि, वो कितने सहज व्यक्ति थे.
लल्लनटॉप को दिए अपने एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर बताते हैं कि, “हम एक नई गाड़ी खरीदना चाहते थें, हमने इसके लिए 1.5 करोड़ रुपये इकट्ठा कर लिए थे. हमने सोचा चलो एक नई गाड़ी लेते हैं. शाम को मैं अपने घर में बैठकर टीवी देख रहा था. उस समय एक किसान ने आत्महत्या की थी और उसकी फैमिली का इंटरव्यू चल रहा था.”
इंटरव्यू के दौराना नाना थोड़ा भावुक होते हुए कहते हैं कि, “एक महिला ने अपना पति खोया है. बच्चों ने अपना बाप खोया है. मां-बाप ने अपना बेटा खोया है. इनका इंटरव्यू चल रहा है. उनके चेहरे पर बाप मर गया… बेटा मर गया… पति मर गया… इससे ज्यादा रात की भूख थी. वो जिस तरह से बात कर रहे थें मैं तो डर गया. मैंने कहा हम क्यों गाड़ियां खरीदें… मैंने अपने दोस्त मकरंद अनासपुरे को फोन किया और कहा कि, जिन 1,000 किसानों ने आत्महत्या की है उनके परिवार वालों को 15-15 हजार रुपये का चेक दे दो. 1.5 करोड़ खत्म हो जाएंगे. ”
इस तरह नाना पाटेकर ने अपने दोस्त मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर NAAM फाउंडेशन शुरू किया. और आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों की मदद की. नाना पाटेकर द्वारा शुरू किया गया यह फाउंडेशन महाराष्ट्र राज्य के मराठवाड़ा और विदर्भ के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसानों की मदद के लिए काम करता है, और अब तक अनगिनत किसानों की मदद कर चुका है.



