3 मांगों पर बनी सहमति! बदबू से परेशान पटना, सवाल- कब खत्म होगी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल?

पटना: राजधानी पटना में सफाई व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है. नगर निकाय के सफाई कर्मियों और दैनिक मजदूरों की हड़ताल गुरुवार को लगातार 8वें दिन भी जारी है. इसका सबसे बड़ा असर राजधानी की सफाई व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है. शहर की सड़कों, गलियों, बाजारों और मोहल्लों में कूड़े का अंबार लगा हुआ है.

कर्मचारियों की 3 मांगों पर बनी सहमति : इस बीच खबर है कि पटना नगर निगम ने सफाई कर्मियों की हड़ताल खत्म करने के लिए उनकी तीन मांगों को मान लिया है. बुधवार शाम मेयर की अध्यक्षता में हुई बैठक में मांगों पर सर्वसम्मति से विचार हुआ, जिसके बाद सभी तीन मांगों की मंजूरी दे दी गई. अब इस प्रस्ताव को सरकार को भेजा जाएगा.

क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?

पहली मांग : नगर निकायों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो. सफाई कर्मियों का कहना है कि सफाई जैसे स्थायी कार्य को निजी एजेंसियों के भरोसे छोड़ने से कर्मचारियों का लगातार शोषण हो रहा है.

नगर निगम का जवाब: निगम की ओर से यह अनुरोध किया जाएगा कि सरकार नगर निगम को अपने स्तर पर सफाईकर्मियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दें.

दूसरी मांग : सभी दैनिक सफाई कर्मियों को स्थायी सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले. सफाई कर्मी कहते है कि वर्ष 2018 में 118 दैनिक सफाई कर्मियों को नियमित कर सरकारी कर्मचारी बनाया गया था. जब उस समय नियमितीकरण संभव था तो आज बाकी कर्मियों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है.

नगर निगम का जवाब : जो कर्मचारी पात्र होंगे उन्हें योजना का लाभ दिया जाएगा.

तीसरी मांग : समान वेतन लागू करने की मांग रहे हैं. साथ ही एसीपी और एमएसीपी जैसी लंबित प्रक्रियाओं को फिर से लागू करने और वेतन संबंधी विसंगतियां दूर करने की मांग भी कर रहे हैं.

नगर निगम का जवाब : इस संबंध में विभाग की ओर से लगी रोक हटाने के लिए सरकार को पत्र लिखा जाएगा.

क्या बोलीं महापौर? : महापौर सीता साहू ने कहा कि, नगर निगम लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है. और सफाई व्यवस्था को सामान्य करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं. साथ ही सफाई कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर बातचीत के बाद सफाई कर्मचारियों की 3 मांगों पर सहमति बन गई है.

”सफाई कर्मियों की जो मांग है वह नगर निगम के क्षेत्राधिकार से बाहर का है और इस पर विभाग ही कुछ कर सकता है. सफाई कर्मियों की विभाग से वार्ता की प्रक्रिया चल रही है. उम्मीद है हड़ताल जल्द समाप्त हो जाएगी.” – सीता साहू, महापौर

क्या बोले नगर आयुक्त? : वहीं, बैठक के बाद नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि बातचीत सकारात्मक हुई है. सफाई कर्मियों का जल्द काम पर लौटना जरूरी है. ऐसे में उन्हे उम्मीद की हड़ताल जल्द समाप्त हो जाएगी.”

अपनी मांगों पर अड़े सफाईकर्मी : इस बीच, सफाई कर्मी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. हड़ताल का नेतृत्व कर रहे सफाई कर्मी नेता मोहन पासवान ने कहा कि यह आंदोलन किसी वेतन वृद्धि के लिए नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई है.

”वर्षों से नगर निकायों में सफाई का काम करने वाले हजारों कर्मी आज भी अस्थायी स्थिति में काम कर रहे हैं. जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. इस मांग को लेकर सभी नगर निकाय के सफाई कर्मी हड़ताल पर है.” – मोहन पासवान, सफाईकर्मी

कब मिलेगा सरकारी कर्मचारी का दर्जा? : वहीं हड़ताल में शामिल सफाईकर्मी कांति देवी ने कहा कि, वे प्रतिदिन शहर की सफाई करती हैं, लोगों के घरों और सड़कों से कूड़ा उठाती हैं और सरकार का काम करती हैं. इसके बावजूद उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि वर्षों से नगर निगम के लिए काम करने के बाद भी उन्हें अस्थायी मजदूर की तरह देखा जाता है.

”सफाई कर्मी हर मौसम में काम करते हैं. बरसात हो, गर्मी हो या ठंड, उन्हें रोजाना सड़कों पर उतरना पड़ता है. शहर को साफ रखना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन उनके भविष्य की कोई सुरक्षा नहीं है. उनकी भी इच्छा है कि उन्हें स्थायी सरकारी कर्मचारी बनाया जाए ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके और सम्मान के साथ जीवन जी सकें.” – कांति देवी, सफाईकर्मी

शहर में 900 टन कचरा जमा : नगर निगम के अनुमान के मुताबिक पिछले सात दिनों में करीब 900 टन से अधिक कचरा सड़कों और डंपिंग प्वाइंट पर जमा हो चुका है. लगातार हो रही बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. गीले कचरे से उठ रही दुर्गंध, सड़कों पर बहता कचरा और जलजमाव ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है.

इन इलाकों में जगह-जगह कूड़े का ढेर : पटना के कंकड़बाग, राजेंद्र नगर, बोरिंग रोड, पटना सिटी, अशोक राजपथ, कदमकुआं, गर्दनीबाग, अनीसाबाद, बेली रोड और कई अन्य इलाकों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं. कई स्थानों पर कचरा इतना अधिक जमा हो गया है कि सड़कें संकरी हो गई हैं

नाक-मुंह दबाकर गुजरते हैं लोग : कई इलाकों में वाहन चालकों को निकलने में परेशानी हो रही है, जबकि पैदल चलने वाले लोग नाक पर रूमाल रखकर गुजरने को मजबूर हैं. बरसात के कारण कचरा सड़क पर फैल गया है, जिससे आसपास का वातावरण दूषित हो गया है.

बदबू से परेशान लोग : स्थानीय रवि शर्मा ने बताया कि, ”घर की खिड़की खोलना तक मुश्किल हो गया है. पूरे इलाके में बदबू फैली हुई है. सबसे अधिक चिंता छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर है. लोगों को डर है कि यदि जल्द सफाई शुरू नहीं हुई तो डेंगू, मलेरिया, डायरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.”

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