बिहार उपभोक्ता आयोग ने डॉक्टर पर ठोका 20 लाख का मुआवजा, इलाज में लापरवाही से मां-बच्चे की हुई थी मौत
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पटना: बिहार राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने चिकित्सकीय लापरवाही के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने छपरा की एक महिला डॉक्टर बिमला शाही पर 20 लाख रुपये का मुआवजा लगाने का आदेश दिया है. आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल पुरानी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर भरोसा कर मरीज की जानलेवा पीड़ा को नजरअंदाज करना गंभीर अपराध है.
गर्भ में बच्चे की हलचल बंद होने की शिकायत
यह मामला छपरा के भगवानबाजार स्थित ‘भूमिजा चिकित्सा केंद्र’ से जुड़ा है. पीड़िता शालू जैन (पति नीरज कुमार जैन) गर्भावस्था के दौरान पेट में असहनीय दर्द और गर्भ में बच्चे की हलचल बंद होने की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास गई थी. आरोप है कि डॉक्टर ने शारीरिक जांच किए बिना सिर्फ पुरानी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर सब कुछ ‘नॉर्मल’ बता दिया.
डॉक्टर ने इलाज के बजाय डांटकर भगाया
6 अक्टूबर 2013 को जब महिला तड़पते हुए दोबारा डॉक्टर के पास पहुंचीं, तो डॉक्टर ने इलाज करने के बजाय उन्हें डांटकर भगा दिया. डॉक्टर ने कहा, “एक फीस में प्रत्येक दिन दिखाना चाहते हो? कुछ नहीं है, दवा खाओ सब ठीक हो जाएगा.” हालत बिगड़ने पर मरीज को पटना के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
गर्भ में शिशु की मौत
जांच में पता चला कि गर्भ में शिशु की काफी समय पहले ही मौत हो चुकी थी, जिसके कारण पूरे शरीर में जहर फैल गया था. इलाज के दौरान 11 अक्टूबर 2013 को शालू जैन ने दम तोड़ दिया. इस तरह एक हंसती-खेलती जिंदगी और गर्भ में पल रहे मासूम को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया.
डॉक्टर ने पुरानी रिपोर्ट पर आंख मूंदकर किया भरोसा
आयोग की सुनवाई में जस्टिस संजय कुमार ने पाया कि डॉक्टर ने अपनी जिम्मेदारी और पेशेवर दक्षता का सही पालन नहीं किया. पीठ ने कहा कि “यदि मरीज को तेज दर्द था, तो डॉक्टर को तुरंत दूसरी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट या किसी अन्य विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए थी. केवल पुरानी रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा करना स्वीकार्य नहीं है.”
60 दिनों के भीतर 20 लाख रुपये का मुआवजा
आयोग ने ‘रेस इप्सा लोक्विटुर’ के सिद्धांत को लागू करते हुए डॉक्टर को दोषी ठहराया. पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसी लापरवाही न सिर्फ मरीज बल्कि गर्भस्थ शिशु के जीवन के अधिकार का भी उल्लंघन है. आयोग ने निर्देश दिया कि पीड़ित पति नीरज कुमार जैन को 60 दिनों के भीतर 20 लाख रुपये का मुआवजा और 20 हजार रुपये मुकदमे का खर्च अदा किया जाए. निर्धारित समय सीमा में भुगतान न करने पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.



