पटना से करीब 35 किलोमीटर दूर बिहटा प्रखंड के कंचनपुर गांव स्थित मां वनदेवी महाधाम अब द वन मूवी की वजह से चर्चा का केंद्र बन गया है.
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फिल्म में मंदिर के इतिहास और मान्यता के साथ बिहार की संस्कृति व छठ पूजा को दिखाए जाने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. 25 सितंबर को रिलीज होने वाली इस फिल्म से पहले ही मंदिर में बिहार सहित आसपास के राज्यों से भक्त पहुंच रहे हैं.
मंदिर की स्थापना और प्राचीन इतिहास
मंदिर के मुख्य पुजारी शीतलेश्वर मिश्र के अनुसार, मां वनदेवी महाधाम की स्थापना 1600 ईस्वी में उनकी आठवीं पीढ़ी के पूर्वज विद्यानंद मिश्र ने की थी. विद्यानंद मिश्र मां विंध्यवासिनी के परम भक्त थे और हर नवरात्र में पैदल ही मां के दरबार पहुंचकर पूजा-अर्चना करते थे. उम्र बढ़ने पर उन्होंने मां विंध्यवासिनी व अष्टभुजा मां को सिद्ध कर गंगा जल और गंगा की मिट्टी से पिंड बनाकर कंचनपुर के वन क्षेत्र में स्थापना की. तब से निरंतर पूजा-अर्चना चल रही है.
मूवी में दिखाई गई मान्यता पूरी तरह सत्य
शीतलेश्वर मिश्र ने स्पष्ट किया कि द वन मूवी में मंदिर की जो मान्यता दिखाई गई है, वह पूरी तरह सत्य है. आसपास के जंगलों में कई देवी शक्तियां विराजमान हैं. जो भक्त सच्चे मन से मां की आराधना करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. मंदिर के आसपास जड़ी-बूटियां भी पाई जाती हैं। रात में पूजा के लिए रुकने की अनुमति है, लेकिन आमतौर पर कोई नहीं रुकता.
“मूवी में दिखाई गई मंदिर की मान्यता पूरी तरह सत्य है. जो भक्त सच्चे मन से मां की आराधना करते हैं, उनकी मनोकामना मां अवश्य पूर्ण करती हैं. आसपास के जंगलों में कई देवी शक्तियां भी विराजमान हैं.”-शीतलेश्वर मिश्र,मुख्य पुजारी, वन देवी मंदिर
मंदिर में कभी ताला नहीं लगता और न ही कभी चोरी हुई है. गर्भगृह का दरवाजा केवल मां की चुनरी से बांध दिया जाता है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक बनी हुई है. नवरात्र के अवसर पर हजारों-लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंगलवार और रविवार को भी भारी भीड़ जुटती है.
मूवी के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में उछाल
फिल्म में मंदिर का जिक्र होने के बाद प्रतिदिन हजारों भक्त बिहार के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों से पूजा करने आ रहे हैं. निर्देशक, लेखक और निर्माता ने मंदिर की मान्यता को सही तरीके से प्रस्तुत किया है, जिससे आस्था और भी मजबूत हुई है.
बिहार की संस्कृति और छठ पूजा का चित्रण
द वन मूवी में सिर्फ मंदिर ही नहीं, बल्कि बिहार की लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा को भी प्रमुखता से दिखाया गया है. इससे फिल्म बिहार के लिए खास चर्चा का विषय बन गई है. स्थानीय संस्कृति का सकारात्मक चित्रण होने से लोग फिल्म का इंतजार कर रहे हैं.
रिलीज से पहले ही चर्चा का विषय
25 सितंबर को सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की देशभर में रिलीज होने वाली द वन मूवी पहले ही धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से सुर्खियों में है. मां वनदेवी महाधाम अब और अधिक भक्तों को आकर्षित कर रहा है. आस्था, इतिहास और सिनेमा के इस संगम ने कंचनपुर गांव को नई पहचान दी है.



