एक तरफ बाढ़ में डूबा गांव.. दूसरी तरफ रिंग बांध क्षतिग्रस्त, गोपालगंज में तबाही का मंजर

गोपालगंज: वाल्मीकिनगर बराज से गंडक नदी में छोड़े गए 5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी के भीषण दबाव को बिहार का बैकुंठपुर प्रखंड झेल नहीं सका. शीतलपुर गांव के पास स्थित रिंग बांध ध्वस्त होने के बाद इलाके में तबाही का मंजर है. बाढ़ का पानी गांवों में प्रवेश कर जाने से हजारों लोग बेघर हो गए हैं. अपनी जान और बचा-खुचा सामान लेकर ग्रामीण अब सड़क किनारे और ऊंचे बांधों पर तिरपाल तानकर दिन गुजारने को मजबूर हैं.
रिंग बांध ध्वस्त होने के बाद तबाही!
ईटीवी भारत की टीम जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर ग्राउंड जीरो यानी शीतलपुर रिंग बांध के उसी क्षतिग्रस्त हिस्से पर पहुंची, जहां तबाही की यह पटकथा लिखी गई. घटनास्थल पर वर्तमान में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ‘कट एंड क्लोजिंग’ का कार्य शुरू कर दिया गया है. कटाव को रोकने के लिए नदी के किनारे बम्बू पाइलिंग और कटारोधी कार्य किए जा रहे हैं. राहत और बचाव कार्य में लगे मजदूर और इंजीनियर बांध को और अधिक कटने से बचाने की जद्दोजहद में जुटे
सरकार को ठहराया जिम्मेदार
मौके पर मौजूद स्थानीय ठेकेदार और साइड इंजीनियर से जब बांध टूटने के कारणों पर बात की गई, तो उन्होंने प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों को खारिज करते हुए सीधे राज्य सरकार पर हमला बोला. ठेकदार ने आरोप लगाया कि बांध टूटने के लिए प्रशासन नहीं, बल्कि सरकार जिम्मेदार है.

‘सस्पेंड कर देना ठीक नहीं’
ठेकेदार ने अधिकारियों का बचाव करते हुए कहा कि एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड कर देना बहुत आसान है लेकिन जब निचले अधिकारियों को काम करने के लिए बोरी ही नहीं मिलेगी तो वे टेकअप कैसे करेंगे? छोटे स्थानीय ठेकेदारों को केवल 500 से 1000 बोरियां दी जाती हैं, जबकि बाहरी बड़ी एजेंसियों को लाख-लाख बोरियां आवंटित कर दी जाती हैं.
बंबू पाइलिंग से रुका कटाव
स्थानीय ठेकेदारों में क्षमता होने के बावजूद उन्हें काम नहीं दिया जाता. संकट के समय बंबू पाइलिंग जैसे जोखिम भरे कामों के लिए बड़े ठेकेदार मैदान में नहीं आते, तब स्थानीय छोटे ठेकेदारों को ही आगे किया जाता है. डीएम और एसपी लगातार क्षेत्र में डटे रहे. अधिकारियों की मुस्तैदी का ही नतीजा है कि सारण बांध को बचा लिया गया, वर्ना तबाही और भी विकराल होती.
“लोग कहते हैं प्रशासन की लापरवाही से बांध टूटा लेकिन मेरा अनुभव कहता है कि इसके लिए सरकार जिम्मेदार है. अगर सरकार समय पर संसाधन उपलब्ध कराती, तो यह बांध कभी नहीं टूटता. बाढ़ नियंत्रण फ्लड फाइटिंग के काम में जब तक अधिकारियों को ईसी बैग और पर्याप्त फंड नहीं दिया जाएगा, तब तक वे काम कैसे करेंगे?”- संतोष कुमार, संवेदक
विधायक से भी नाराजगी
वहीं, बैकुंठपुर विधायक और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी पर निशाना साधते हुए संवेदक ने कहा, ‘विधायक जी व्यक्तिगत रूप से अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन मंत्री बनने के बाद उनके पास बाढ़ प्रभावित जनता के लिए समय नहीं है. उनको पूर्व विधायकों और अन्य लोगों से राय-मशविरा करनी चाहिए कि कैसे बांध को सुरक्षित रखा जाए?’
क्या बोले सहायक अभियंता?
फिलहाल स्थानीय और पटना से आई जल संसाधन विभाग की टीम बांध के मरम्मतीकरण कार्य में जुटी हुई है. सहायक अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि बांध को मजबूत किया जा रहा है. बंबू पाइलिंग करने से बांध में कटाव रुक जाएगा और आगे नहीं बढ़ेगा.
“सबसे पहले हमलोगों का काम है कि यह बढ़े नहीं, इसके सबसे पहले रोकना है. बंबू पाइलिंग कर रहे हैं. फिर ईसी बैग भरकर रोकेंगे. फिलहाल इतना ही कर रहे हैं. जब पूरा पानी चौर से इस साइड नदी में आ जाएगा तब क्लोज करने का काम किया जाएगा.”- पीयूष कुमार, सहायक अभियंता
बाढ़ के कारण तबाही
वहीं गांव में हर तरफ बाढ़ का पानी भर चुका है, जिस वजह से लोगों को ऊंचे स्थानों पर शरण लेना पड़ रहा है. बड़ी संख्या में लोग सड़क के दोनों किनारे में तंबू गाड़कर रह रहे हैं. लोग पानी घटने का इंतजार कर रहे



