पटना: RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश बिहार विधान परिषद् के माननीय सदस्य बन गए हैं. दीपक प्रकाश की कुर्सी बचाने के लिए बीजेपी के नेता देवेश कुमार ने एमएलसी पद छोड़ दिया था. जानकारी के अनुसार सम्राट कैबिनेट में इसे मंजूरी दी गई है. हालांकि 17 एजेंडों की सूची में ये फैसला शामिल नहीं है. वहीं बेटे को एमएलसी बनाए जाने को लेकर उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए के तमाम बड़े नेताओं का आभार जताया है.
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दीपक प्रकाश पर राजनीतिक खींचतान खत्म : बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के बिना किसी सदन का सदस्य बने 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर बने रहने को लेकर एक बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया था. इस मामले पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया और बिहार सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया. यह पूरा मामला भारतीय संविधान के नियमों को दरकिनार करने और राजनीतिक खींचतान से जुड़ा हुआ है.
“हमारी नजर थी. यह तो होना ही था. एनडीए ने इसका हल निकाल लिया है. अपनी पार्टी की ओर से हम एनडीए के तमाम बड़े नेताओं के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को हार्दिक आभार प्रकट करते हैं.” – उपेंद्र कुशवाहा, आरएलएम अध्यक्ष

क्या है पूरा विवाद?: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत कोई भी व्यक्ति बिना चुनाव जीते या बिना किसी सदन का सदस्य बने अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक यह अवधि सिर्फ एक बार के लिए ही है. इस अवधि के भीतर उसे विधायक या विधान परिषद
बिहार सरकार पर था संवैधानिक संकट : दीपक प्रकाश को 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन नीतीश कुमार सरकार में पहली बार मंत्री बनाया गया था. इस लिहाज से बिना सदन की सदस्यता के उनके मंत्री रहने की 6 महीने की तय समय-सीमा मई 2026 में ही समाप्त हो चुकी थी. दोबारा शपथ और ‘जीरो क्लॉक’ का विवाद तब और गहरा गया जब 7 मई 2026 को सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में नई एनडीए सरकार का गठन हुआ.

राज्यपाल कोटे से हुआ मनोनयन : वहीं, सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने एक ही विधानसभा के कार्यकाल में दोबारा शपथ दिलाकर संविधान की भावना के साथ खिलवाड़ किया है. फिलहाल दीपक प्रकाश राज्यपाल कोटे से एमएलसी का मनोनयन हो गया है. ऐसे में देखना है पहले दायर की गई याचिका में सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाता है.



