पूर्वी चंपारण: बिहार का पूर्वी चंपारण जिला अब भीषण बाढ़ की आपदा से धीरे-धीरे उबरने लगा है

पूर्वी चंपारण: बिहार का पूर्वी चंपारण जिला अब भीषण बाढ़ की आपदा से धीरे-धीरे उबरने लगा है. मोतिहारी में गंडक नदी का जलस्तर करीब चार फीट नीचे चला गया है और बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात सामान्य होने की ओर बढ़ रहे हैं. इस प्राकृतिक आपदा के दौरान जिला प्रशासन, स्थानीय ग्रामीणों, वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों तथा राहत दलों के बीच बेहतर समन्वय ने बड़ी चुनौती को संभालने में अहम भूमिका निभाई.

ग्रामीणों को क्षति नहीं होने का श्रेय

 

मोतिहारी के जिलाधिकारी सुमन सौरभ यादव ने बाढ़ की स्थिति और प्रशासन की तैयारियों को लेकर बताया कि इस आपदा में जान-माल की क्षति नहीं होने का श्रेय सबसे पहले ग्रामीणों को दिया जाना चाहिए. इसके बाद वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों तथा अंत में प्रशासन को इसका श्रेय जाता है.

 

“चंपारण तटबंध को सुरक्षित रखने और जहां-जहां दरारें आईं, वहां ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया. ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बने इस मजबूत तालमेल ने न केवल हजारों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि राहत और पुनर्वास से जुड़े कार्यों को भी तेजी से जमीन पर उतारने में मदद की.”-सुमन सौरभ यादव, जिलाधिकारी, मोतिहारी

 

राहत और बचाव अभियान

 

बाढ़ प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को लगाया गया. सरकारी और निजी नावों के जरिए लोगों को चिह्नित सुरक्षित शरणस्थलों तक पहुंचाया गया. इस दौरान स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने भी राहत दलों का मार्गदर्शन किया. ऊंचे स्थानों पर बनाए गए राहत शिविरों के संचालन में स्थानीय लोगों ने प्रशासन का सहयोग किया.

 

सामुदायिक रसोई का संचालन

 

राहत अभियान का एक बड़ा हिस्सा सामुदायिक रसोई के संचालन का रहा. प्रशासन ने युद्ध स्तर पर सामुदायिक रसोई शुरू कराई. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम लोगों ने इसमें स्वेच्छा से श्रमदान किया. बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई. जिले में 28 स्थानों को चिह्नित कर सामुदायिक रसोई सं

चालित की गई.

 

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