बाढ़ के बीच भूख और बेबसी, बांध टूटने के बाद डूबे घर, पीड़ितों के सामने रहने और खाने के पड़े लाले

बाढ़ के बीच भूख और बेबसी, बांध टूटने के बाद डूबे घर, पीड़ितों के सामने रहने और खाने के पड़े लाले

बेतिया: बिहार के बेतिया के नौतन प्रखंड के शिवराजपुर में चंपारण तटबंध टूटने के बाद पूरा इलाका जलमग्न हो गया. इस क्षेत्र के लोगों के सामने रहने-खाने की बड़ी समस्या हो गयी है. स्थानीय निवासी फूलमती देवी, गीता देवी और अंजू देवी बताती हैं कि सोमवार रात पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई. जब वे घर से बाहर निकलीं तो सामने नदी की तेज धार और डूबते घरों का मंजर देखकर डर गईं. इससे पहले कि वे कुछ समझ पातीं, पानी उनके घर में घुस चुका था.

 

जान बचाने के लिए भागना पड़ा

 

ऐसे हालात में उन्होंने परिवार के साथ अपनी जान बचाने को प्राथमिकता दी. सुबह जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो घर और उसमें रखा सामान बाढ़ के पानी में समा चुका था. पीड़ितों का कहना है कि “रात एक बजे अचानक बांध टूटा. हल्ला होने पर सभी लोग अपनी-अपनी जान बचाकर भाग निकले. जिसके हाथ जो सामान आया लेकर आए, अन्य जरूरत का सामान घर में ही रह गया, घर डूब गए.”

 

 

लापरवाही का आरोप

 

किसी तरह अपनी जान बचाकर बांध पर आई महिलाएं परेशान हो रही हैं. उनका कहना है कि इस बाढ़ में सालभर की उनकी पूंजी तबाह हो गयी है. एक महिला ने कहा कि रात एक बजे से बांध पर बैठे हुए हैं. घर का सारा सामान बाढ़ में बह गया. एक बाढ़ पीड़ित ने बताया कि, जेई साहब रात 12 बजे ही तटबंध से गायब हो गए थे. रात में एक से डेढ़ बजे तक बांध से पानी लीक होने लगा था. इसके बाद बांध टूट गया. हम लोग काफी कोशिश किए लेकिन बांध को नहीं बचा सके.

 

गांवों में मची अचानक अफरा-तफरी

 

बेतिया के शिवराजपुर में बाढ़ की ये तस्वीरें किसी को भी झकझोर देने वाली हैं. नौतन और बैरिया प्रखंड की सीमा पर बसे गांवों में सोमवार की रात करीब दो बजे उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब चंपारण तटबंध अचानक टूट गया. तटबंध टूटते ही तेज धार के साथ पानी गांवों की तरफ बढ़ा और देखते ही देखते नौतन के शिवराजपुर सहित बैरिया के पुलिया खाड़ इलाके के कई गांव जलमग्न हो गए.

 

तबाही में सब कुछ बहा

 

बाढ़ की इस तबाही में लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी जान बचाने की थी. पीड़ितों ने कहा कि, रात में अचानक बांध टूटने की आवाज सुनाई दी. इसके बाद लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर घरों से बाहर निकले और सुरक्षित स्थान की तरफ भागे. लोगों का कहना है कि किसी तरह उनकी जान तो बच गई, लेकिन घर में रखा सामान, अनाज, कपड़े और वर्षों की मेहनत से जुटाई गई गृहस्थी पानी की तेज धार में बह गई.

 

लापरवाही से बढ़ा संकट

 

सोमवार सुबह से ही मंगलपुर कला और विशम्भरपुर सहित आसपास के कई गांवों में पानी घुसने के बाद दहशत का माहौल था. ग्रामीण लगातार मदद की गुहार लगा रहे थे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी परेशानी के बावजूद मौके पर समय रहते जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक टीम नहीं पहुंच सके. इसी बीच गंडक बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद नदी की धार और तेज होती चली गई. बढ़ते जलस्तर ने धीरे-धीरे आसपास के और गांवों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया.

 

देर रात टूटा चंपारण तटबंध

 

“शाम होते-होते कई गांवों में पानी तेजी से फैलने लगा और देर रात पानी का बहाव बेहद तेज हो गया. इसी दौरान चंपारण तटबंध का एक हिस्सा पानी के दबाव में टूट गया. तटबंध टूटते ही पानी की तेज धार गांव की ओर बढ़ी और कुछ ही समय में घरों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया.” -बाढ़ पीड़ित

 

बेबसी के आंसू रो रहे ग्रामीण

 

आज इन गांवों में सिर्फ पानी नहीं है, बल्कि उन परिवारों की आंखों में बेबसी भी है, जिन्होंने एक ही रात में अपनी वर्षों की मेहनत से बनाई गृहस्थी खो दी. किसी का घर डूब गया, किसी का अनाज बह गया, तो किसी के सामने बच्चों को सुरक्षित रखने की चुनौती है.

 

राहत और बचाव कार्य की मांग

 

बाढ़ पीड़ितों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द राहत और बचाव अभियान तेज करे, प्रभावित परिवारों तक भोजन, पीने का पानी और जरूरी सामग्री पहुंचाई जाए और टूटे हुए तटबंध की तत्काल मरम्मत कराई जाए. फिलहाल नौतन और बैरिया के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का संकट बना हुआ है.

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