🙏 श्री नैना देवी मंदिर का इतिहास
श्री नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और यहां माता नैना देवी के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे। संसार को विनाश से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के विभिन्न अंगों को अलग किया। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सती की आंख (नयन) गिरी थी। इसी कारण इस स्थान का नाम नैना देवी पड़ा।

मंदिर से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध लोककथा में राजा बीर चंद का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि उन्हें एक दिव्य संकेत प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्होंने इस स्थान पर माता नैना देवी का मंदिर स्थापित कराया।

नैना देवी को भक्त जागृत शक्ति के रूप में पूजते हैं। यहां विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान विशाल मेले और धार्मिक आयोजन होते हैं। सावन तथा अन्य प्रमुख पर्वों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं।

मंदिर का धार्मिक महत्व केवल हिमाचल तक सीमित नहीं है। उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां आकर मनोकामना पूर्ति, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए माता का आशीर्वाद लेते हैं।
जय माता दी 🙏🚩



