बिहार पेपरलीक का मुख्य केंद्र बन चुका है। कोई परीक्षा पारदर्शी तरीके से आयोजित नहीं होती। प्रतियोगी परीक्षा तो छोड़िए यहाँ स्कूली स्तर पर 10वीं और 12वीं की परीक्षा का पेपर लीक होता है।

कोई भी बहाली प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं है इसलिए योग्य और काबिल अभियार्थियों का चयन होना मुश्किल हो रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बिहार सबसे फिसड्डी है। पूरे देश में बिहार की नामांकन दर सबसे कम, और स्कूल छोड़ने की दर सबसे अधिक है। लगातार सामने आ रहे विवाद छात्रों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।
अब तो बिहार में शिक्षा का भगवाकरण किया जा रहा है। स्कूलों में किताब नहीं, शिक्षक नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं! युवा बेचैन और बेसब्र है। बेरोजगारी सबसे अधिक है। 1 करोड़ नौकरी का वादा करने वालों ने अब तक 1 लाख नौकरियां भी नहीं दी है।
अब बस बहुत हुआ। युवा इनके जुमले नहीं सुनेंगे। अब हर स्तर पर विरोध होगा-प्रदर्शन होगा। यह हमारा खुला लोकभवन मार्च है। नौकरी की तैयारी कर रहे- युवा, कोचिंग संस्थान, विश्वविद्यालय, कॉलेज के छात्र-छात्राएं, शिक्षक, महिला जो पेपरलीक, सरकारी तानाशाही और बेरोजगारी की समस्या से परेशान है वह इस मार्च में शामिल हो सकता है। मार्च के जरिए राज्यपाल को आपकी मांगों और समस्याओं से अवगत कराया जाएगा।
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