2000 रुपये के UPI ट्रांजेक्शन पर लगेगा चार्ज? जान लीजिए A to Z नियम
सरकार ने संसद में नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत MDR चार्ज की वापसी हो रही है. इसके तहत 2000 रुपये के ऊपर पेमेंट पर चार्ज देना होगा, लेकिन ये आम कस्टमर्स से नहीं लिया जाएगा. आइए जानते हैं ये किसपर लागू होगा…
वित्त मंत्रालय ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है. इस बिल के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की बात कही गई है. यह चार्ज 2000 रुपये से ज्यादा की लिमिट पर लागू किया जा सकता है. इसका मतलब है कि अगर 2000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट एकबार में किया जाता है तो MDR चार्ज देना होगा.
लेकिन यह लिमिट सभी यूजर्स के लिए नहीं है, बल्कि व्यवसाय से जुड़ा हुआ है. आम यूजर्स पर इसका कोई असर नहीं होगा. दूध, सब्जियां, किराने का सामान जैसी रोजमर्रा की खरीदारी और ऑटो रिक्शा व टैक्सी के किराए पर इसका असर पड़ने की संभावना नहीं है. हालांकि, सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी भ्रम फैला हुआ है कि कुछ पोस्ट में यह दांवा किया गया है कि यह सभी यूजर्स पर लागू होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. आइए विस्तार से समझते हैं…
क्या है 2000 रुपये की लिमिट?
1. TOI को सूत्रों से पता चला है कि यह प्रस्ताव मुख्य रूप से ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेनदेन और बड़े कमर्शियल संस्थानों को टारगेट करता है. इससे कंज्यूमर टू कंज्यूमर्स के बीच हुए ट्रांजेक्शन को छूट होगी. अगर आप 2000 रुपये से ज्यादा का भी पेमेंट करते हैं तो आपको कोई चार्ज नहीं देना होगा.
2.आम यूजर्स पहले की तरह ही ₹2,000 से अधिक का भुगतान कर सकते हैं. सामान्य UPI सीमा ₹1 लाख प्रतिदिन पेमेंट कर सकते हैं और कुछ स्पेशल कैटेगरी (जैसे अस्पताल, शिक्षा, टैक्स) में इससे कहीं अधिक सीमा तक पेमेंट कर सकते हैं.
3.MDR एक ऐसा शुल्क है, जो व्यवसाय, डिजिटल लेनदेन करने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को देते हैं, इसलिए कोई भी शुल्क व्यापारियों पर लागू होगा, न कि UPI का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं पर.
4.यह कदम जनवरी 2020 में शुरू होने वाला था, लेकिन सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR चार्ज लगाने से रोक दिया था.
यह किन यूजर्स पर लागू होगा?
यह मुख्य तौर पर बैंक, UPI सर्विस प्रोवाइडर, मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम, BHIM-UPI के माध्यम से छोटे भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों पर पड़ता है, क्योंकि इंसेंटिव इन्हीं ट्रांजेक्शनों के आधार पर दिया जाता है. एक आंकड़े के मुताबिक, 95 फीसदी 2000 रुपये से ज्यादा की लिमिट से कम वाले ही ट्रांजेक्शन होते हैं. सिर्फ 5 फीसदी ही ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से ज्यादा का होता है. इसका मतलब है कि इन 5 फीसदी ही मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर ये चार्ज लागू होगा.
कितना लगेगा चार्ज?
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2000 रुपये से ऊपर के व्यावसायिक लेन-देन पर प्रस्तावित शुल्क 0.25% से 0.4% तक हो सकता है, और 25-30 बेसिस पॉइंट्स तक के शुल्क पर भी चर्चा चल रही है. इसके लागू होने की समयसीमा पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है.



