Pitru Paksha: 676 सीढ़ियों की कठिन चढ़ाई, सत्तू से पिंड बनाकर उड़ाने की परंपरा; गया के प्रेतशिला में कैसे होता है तर्पण

Pitru Paksha: 676 सीढ़ियों की कठिन चढ़ाई, सत्तू से पिंड बनाकर उड़ाने की परंपरा; गया के प्रेतशिला में कैसे होता है तर्पण

प्रेतशिला की 676 सीढ़ियां… कहीं हाथ में पिंडदान की सामग्री, कहीं पूर्वजों के नाम का संकल्प और कहीं बुजुर्ग परिजन को सहारा देते कदम। चढ़ाई कठिन थी, लेकिन पितरों की मुक्ति की आस ने थकान को पीछे छोड़ दिया।

 

पितृपक्ष मेला (Pitru Paksha Mela 2026) के दूसरे दिन रविवार को प्रेतशिला में ऐसा ही आस्था का दृश्य देखने को मिला। सुबह से ही हजारों पिंडदानी ब्रह्मसरोवर की ओर बढ़ते रहे।

 

स्नान और तर्पण के बाद श्रद्धालुओं ने प्रेतशिला की सीढ़ियां चढ़ीं और वेदी पर पहुंचकर अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान किया। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं के मंत्रोच्चार से पूरा प्रेतशिला क्षेत्र पितृ स्मरण के भाव से सराबोर रहा।

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रेतशिला वेदी अकाल मृत्यु को प्राप्त स्वजनों के निमित्त पिंडदान के लिए विशेष महत्व रखती है। इसी मान्यता के कारण पितृपक्ष में यहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

 

प्रेतशिला की पिंडदान परंपरा में सत्तू से पिंड बनाने और बाद में सत्तू उड़ाने की भी विशेष परंपरा है। आस्था के अनुसार इसे पितरों की मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है।

 

धनबाद से छत्तीसगढ़ तक, पितरों की शांति को पहुंचे श्रद्धालु

झारखंड के धनबाद बैंक मोड़ निवासी सुरेंद्र गोयल छह लोगों के साथ प्रेतशिला पहुंचे। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्य 17 दिनी पिंडदान कर रहे हैं।

 

 

धनबाद से छत्तीसगढ़ तक, पितरों की शांति को पहुंचे श्रद्धालु

झारखंड के धनबाद बैंक मोड़ निवासी सुरेंद्र गोयल छह लोगों के साथ प्रेतशिला पहुंचे। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्य 17 दिनी पिंडदान कर रहे हैं।

 

मुख्य यजमान पुरुषोत्तम गोयल और विनोद गोयल समेत परिवार के अन्य सदस्य श्राद्ध कर्म में शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के खरसिया निवासी आशीष अग्रवाल तीन परिवार के सदस्यों के साथ यहां पहुंचे।

 

उन्होंने बताया कि वे 17 दिन का पिंडदान कर रहे हैं और इसकी शुरुआत पुनपुन नदी से की है। उनका व्यवसाय भवन निर्माण सामग्री, छड़ और सीमेंट से जुड़ा है। कोलकाता, दिल्ली, जयपुर समेत कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने भी प्रेतशिला वेदी पर पिंडदान किया

 

ओडिशा के राउरकेला क्षेत्र के गढ़पोस से आए 13 परिवार के दलमिया परिवार के मुख यजमान बांके बिहारी निया ने भी पूर्वजों का पिंडदान किया। आचार्य अरुण मिश्रा और अरुण कुमार पाठक ने कई श्रद्धालुओं को पिंडदान कराया।

 

सत्तू के पिंड से पितरों को अर्पण, उड़ाने की भी परंपरा

प्रेतशिला में होने वाले पिंडदान की अपनी अलग परंपरा है। यहां श्रद्धालु सत्तू से पिंड तैयार कर पितरों को अर्पित करते हैं। पिंडदान के बाद सत्तू उड़ाने की परंपरा भी निभाई जाती है।

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