गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज स्थित मां थावे भवानी का यह मंदिर अपनी भव्य ख्याति और चमत्कारों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास 16वीं सदी के चेरो वंश के शासनकाल से जुड़ा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि इस प्राचीन मंदिर का निर्माण हथुआ राज के राजा द्वारा कराया गया था. निर्माण से लेकर आज तक यह मंदिर जनमानस के लिए अगाध आस्था का केंद्र है
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अहंकारी राजा और परम भक्त की कथा
इस प्रसिद्ध पीठ के पीछे एक अत्यंत रोचक और पौराणिक कथा जुड़ी है. लोक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में यहां मां का एक परम भक्त रहषु रहता था. उस समय वहां के राजा मनन सिंह को अपनी शक्ति और धन-दौलत पर गहरा घमंड था. वे खुद को सबसे बड़ा भक्त मानते थे. राजा के इसी अहंकार के कारण यहां एक अद्भुत ऐतिहासिक घटना हुई, जिसने इस पावन स्थल की महिमा बढ़ा दी.
कामाख्या से थावे पहुंचीं मां भवानी
कहा जाता है कि जब राजा ने भक्त रहषु की भक्ति की परीक्षा लेनी चाही और उसकी चमत्कारी शक्तियों पर विश्वास नहीं किया, तब रहषु के आह्वान पर माता कामाख्या से चलकर अपने भक्त की लाज रखने थावे पहुंची थीं. माता के साक्षात प्रकट होते ही अहंकारी राजा का सर्वनाश हो गया. तभी से लेकर आज तक अनवरत रूप से यहां देवी मां की श्रद्धापूर्वक विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है.
परम भक्त रहषु का प्रसिद्ध मंदिर
मुख्य मंदिर के ठीक समीप ही मां के सच्चे और अनन्य भक्त रहषु का भी एक भव्य मंदिर स्थित है. यहां आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालु माता के दर्शन करने के साथ-साथ उनके इस परम भक्त के दर्शन करना भी कभी नहीं भूलते हैं. नवरात्र के इन विशेष दिनों में यहां का आध्यात्मिक वैभव देखते ही बनता है. सुबह से लेकर देर रात तक पूरा परिसर माता के जयकारों से गूंजता है.
देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु
यह पावन मंदिर न केवल गोपालगंज बल्कि पूरे बिहार और आसपास के राज्यों के लिए विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां केवल स्थानीय जिलों से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, देश के अन्य हिस्सों तथा नेपाल तक से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर मां भवानी की पूजा-अर्चना करते हैं. भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.
मां शैलपुत्री के दर्शन को उमड़ी भीड़
रविवार को नवरात्र के पहले दिन माता रानी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा के लिए सुबह के सूर्योदय के साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी तांता लग गया. इस दौरान माता रानी के भव्य दर्शन के लिए मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं. महिला और पुरुष दर्शनार्थी भक्ति-भाव के साथ अपनी बारी का इंतजार करते हुए लगातार जयकारे लगाते रहे
श्रद्धालुओं ने साझा किया अपना सुखद अनुभव
थावे मंदिर पहुंचे भक्तों में माता के प्रति अटूट विश्वास देखने को मिला. दर्शन करने आए भक्तों ने मंदिर परिसर की व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की जमकर सराहना की. मां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे एक स्थानीय श्रद्धालु केदार यादव ने अपनी खुशी जाहिर की
“हम यहां हमेशा ही आते हैं. मां पर पूरी श्रद्धा है. मांगने की जरूरत नहीं पड़ती, मां खुद ही सब दे देती हैं. यहां आकर हमेशा ही सुकून और शांति मिलती है. इस बार भी वैसा ही अनुभव है. अच्छा लग रहा है, आज से नवरात्र भी शुरू हो गए हैं तो और भी सुखद अनुभव है.” -केदार यादव, श्रद्धालु
सुरक्षा को लेकर तीसरी आंख का पहरा
भक्तों के हुजूम के मद्देनजर नवरात्रि की पूजा-अर्चना सभी भक्त सुव्यवस्थित तरीके से कर सकें, इसके लिए सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. मंदिर परिसर से लेकर गर्भगृह तक आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इन कैमरों के माध्यम से प्रशासनिक पदाधिकारियों द्वारा चप्पे-चप्पे पर और पूरी व्यवस्था पर कंट्रोल रूम से निरंतर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी.
चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात
इसके अलावा थावे मंदिर और उसके आसपास के पूरे इलाके में शांति व्यवस्था और सुचारू संचालन कायम रखने के लिए पुलिस पदाधिकारियों के साथ-साथ दंडाधिकारियों को भी मुस्तैद किया गया है, जो लगातार गश्त लगाएंगे. महिला श्रद्धालुओं को दर्शन पूजन के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा या कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसके लिए विशेष रूप से महिला पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है



